अगर आप उत्तराखंड से हैं तो आप समझ ही गए होंगे की आज मैं कौन सी याद साझा करने वाली हूँ। रस! सिर्फ एक व्यंजन नहीं। रस का अर्थ है, घर ! घर की रसोई, आमा, इजा , बुआ का बड़े प्यार से सिल में पिसा हरे धनिये का नमक, खेत के नींबू और भांग पढ़ना जारी रखें “यादों का रस”
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गर्माहट प्यार की
दिसंबर का महीना और बहार का तापमान -२५ डिग्री,पर आरोही की सहेली का जन्मदिन है तो घर से तो निकलना पड़ेगा, ऐसे मैं मुझे याद आया एक अनमोल तोहफा और फिर हम सब ने पहने प्यार की गर्माहट लिए आईजी के हाथों बिने स्वेटर। पुरे बचपन और लड़कपन की सर्दियाँ इन्ही हाथों से बने स्वेटरोंपढ़ना जारी रखें “गर्माहट प्यार की”
आयो नवल बसंत
माघ मास की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला त्यौहार जिसे हम श्री पंचमी या बसंत पंचमी के नाम से जानते हैं, अपने साथ लेकर आता है उम्मीदें और नया विश्वास कि चाहे पूस का महीना कितना भी लम्बा और सर्द हो बसंत ऋतू अपने साथ नयी कोपलें,नयी फसलें ,फूल और खुशहाली लेकर अवश्य आतीपढ़ना जारी रखें ” आयो नवल बसंत”
दिया और बाती
इस दिसंबर आमा को गए तीन साल पूरे हो गए पर आज भी कई रूपों में हमेशा आस पास ही रहती है। आमा कभी भी खाली नहीं बैठती थी। रसोई निबटा के जब धूप मैं बैठने आती तो हाथ में या तो बुनाई के लिए ऊन होता या फिर आसन काढ़ने के लिए सुई। एकपढ़ना जारी रखें “दिया और बाती “
घी त्यार
आज घी संक्रान्ति है और पहाड़ के हर घर में, या यूँ कहूँ हर पहाड़ी के घर में, चाहे आज वो पहाड़ से कितनी ही दूर हो, एक विशेष पकवान जरूर बनेगा। और ये पकवान है गरमा-गर्म, खूब सारे घी में डूबी बेडुआ रोटी। डाइटिंग पे हो???? कोई बात नहीं ,आज तो घी खानापढ़ना जारी रखें “घी त्यार”
यादें जन्मदिन की…..
माता -पिता का जीवन अपनी संतान की परिधि पे ही घूमता रहता है। जब बच्चे छोटे हों तो हम उनके बचपन की यादों को सिर्फ सहेजते ही नहीं बल्कि उनके बचपन के साथ अपने बचपन को फिर से जीते भी रहते हैं। मेरी छोटी बेटी श्रीजिता का जन्मदिन आने वाला है। तीन साल की होनेपढ़ना जारी रखें “यादें जन्मदिन की…..”
मॉं नंदा , दैणी है जाये।।
पहाडों की गोद में बचपन बीता हो और नंदा देवी के मेले से जुड़ी यादें न समेटी हों! ये मुश्किल है। यूँ तो कई साल हो गए अल्मोड़ा में लगने वाले नंदा देवी के मेले का आनंद लिए हुये पर आज भी मेले की तिथी आते ही कानों में जैसे वो फूंक मारकर बजने वालेपढ़ना जारी रखें “मॉं नंदा , दैणी है जाये।।”
दोस्त, साथी, दगड़ी😍
जीवन में कितने लोग मिले और कई दोस्त बने।कुछ जान बूझ संग छोड़ गए,और कुछ मर्जी से संग रहे।कुछ थोड़ी देर तो साथ चले पर फिर जाने कैसे बिछड़ गए।कुछ साथ में तो चल न सके, पर कभी बिछड़े भी नही।खट्टी मीठी यादें भी बनी, चटपटे किस्से भी बनते गए।जीवन मे कितने लोग मिले औरपढ़ना जारी रखें “दोस्त, साथी, दगड़ी😍”
रंग्वाली पिछौड़ा
अपनी बेटी के साथ न जाने कितनी बार अपने बचपन को फिर से जी लेती है माँ। आज मेरी बिटिया जब मेरी साड़ी लपेट के खेलने लगी तो मुझे फिर मेरे बचपन के वो दिन याद आ गए जब मैं भी आईजी या आमा की साड़ी पहन कर इतराती रहती थी। कोई त्यौहार आये तोपढ़ना जारी रखें “रंग्वाली पिछौड़ा”
लड़का एक खाता केक🎂
कुछ दिन पहले मेरी बेटी के स्कूल में Dr.Seuss का जन्मदिन मनाया गया। Dr.Seuss बच्चों के साहित्य में अपने काल्पनिक पात्रों और rhyming words (तुकांत शब्दों) के बड़े ही मनोरंजक उपयोग के लिए अत्यंत लोकप्रिय हैं। मेरी बेटियों और मुझे भी बहुत पसंद है उनकी लिखी Cat in The Hat और Green Eggs and Ham. पढ़ना जारी रखें “लड़का एक खाता केक🎂”