आज घी संक्रान्ति है और पहाड़ के हर घर में, या यूँ कहूँ हर पहाड़ी के घर में, चाहे आज वो पहाड़ से कितनी ही दूर हो, एक विशेष पकवान जरूर बनेगा। और ये पकवान है गरमा-गर्म, खूब सारे घी में डूबी बेडुआ रोटी। डाइटिंग पे हो???? कोई बात नहीं ,आज तो घी खानापढ़ना जारी रखें “घी त्यार”
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काले कौआ काले, घुघुति माला खाले।
यादों के समंदर से आज निकल के आया है एक ऐसा त्योहार जो वैसे तो पूरे भारत मे बड़ी धूम से मनाया जाता है पर पहाड़ में इसे मनाने का ढंग सबसे खास है। ये त्योहार है काले कौआ यानी घुघुतिया। माघ मास की संक्रांती को मनाया जाने वाला यह पर्व जिसे अन्य प्रदेशों मेंपढ़ना जारी रखें “काले कौआ काले, घुघुति माला खाले।”
*फूलदेई, छम्मा देई*
लगभग छः महीने पहले जब मैंने अपनी छोटी- छोटी पर अनमोल यादों को साझा करने का विचार किया तब जो शब्द सबसे पहले मन में आया उसी शब्द से जुड़े एक अनोखे त्योहार की यादों के साथ आज उस कड़ी को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हूं। फूल देई जिसे फूल संक्रांत भी कहतेपढ़ना जारी रखें “*फूलदेई, छम्मा देई*”